इफिसियों की पत्री अध्याय 1- जो अनेक अनुवादों को जोड़कर लिखा गया है।
[1] इफिसुस नगर के सन्तों (पवित्र लोगों) और येशु मसीह में सच्चे (विश्वासयोग्य) विश्वासियों के नाम पौलुस का पत्र, जो परमेश्वर की इच्छा से येशु मसीह का प्रेरित नियुक्त हुआ है।
[2] हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे।
[3] हमारे प्रभु मसीह येशु के परमेश्वर और पिता की स्तुति हो, जिन्होंने (पिता ने) हमें मसीह में स्वर्गिक स्थानों में हर एक आत्मिक आशीष से आशीषित किया है।
[4] जैसे उसने (पिता ने) हमें जगत की उत्पत्ति से पहिले उसमें (मसीह में) चुन लिया, कि हम प्रेम में उसके (पिता के) साम्हने पवित्र और निष्कलंक हों।
[5] उसने (पिता ने) अपनी इच्छा की अच्छी इच्छा के अनुसार, हमें यीशु मसीह के द्वारा अपने लिए लेपालक संतान के रूप में पहले से ठहराया।
[6] ताकि उसके अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो, जिसके द्वारा उसने (पिता ने) हमें उस प्रिय (मसीह) में स्वीकार किया है।
(लेपालक पुत्र का अर्थ है गोद लिया हुआ बेटा। जब कोई व्यक्ति या दंपत्ति किसी ऐसे बालक को कानूनी और सामाजिक रूप से अपनी संतान के रूप में स्वीकार करता है (जो उनका जैविक या Biological बच्चा नहीं है), तो उस बालक को लेपालक पुत्र कहा जाता है।
कानून की दृष्टि में एक लेपालक पुत्र को परिवार में सगे बेटे के समान ही सारे पारिवारिक और संपत्ति से जुड़े अधिकार प्राप्त होते हैं।)
[7] हमको मसीह में उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, परमेश्वर के उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है,
[8] जिसे उसने सारी बुद्धि और समझदारी के साथ हमें भरपूर किया।
[9] उसने अपनी इच्छा का भेद हमें बताया है, उस सुइच्छा के अनुसार जिसे उसने अपने मन में ठान (तय कर) लिया था।
[10] परमेश्वर की यह योजना थी कि उचित समय आने पर स्वर्ग की और पृथ्वी पर की सभी वस्तुओं को मसीह में एकत्र करे।
[11] उसी (मसीह) में हम भी मीरास (विरासत, उत्तराधिकार) पाए, और उसी (पिता) की मनसा (इच्छा) के अनुसार पहिले से ठहराए गए हैं, जो अपनी इच्छा के मत (योजना) के अनुसार सब कुछ करता है।
[12] कि हम जिन्होंने पहले से मसीह पर आशा रखी थी, उसकी (पिता की) महिमा की स्तुति का कारण हों।
[13] जब तुमने उस सत्य का संदेश सुना जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार था, और जिस मसीह पर तुमने विश्वास किया था, तो जिस पवित्र आत्मा का वचन (प्रतिज्ञा) दिया था, मसीह के माध्यम से उसकी छाप परमेश्वर के द्वारा तुम लोगों पर भी लगायी गयी।
[14] वह आत्मा हमारे उत्तराधिकार के भाग की जमानत के रूप में उस समय तक के लिये हमें दिया गया है, जब तक कि वह हमें, जो उसके अपने है, पूरी तरह छुटकारा नहीं दे देता। इसके कारण लोग उसकी महिमा की प्रशंसा करेंगे।
[15] यही कारण है कि मैं भी प्रभु मसीह येशु में तुम्हारे विश्वास और पवित्र लोगों के प्रति तुम्हारे प्रेम के विषय में सुनकर,
[16] अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें याद करते हुए परमेश्वर को धन्यवाद देना नहीं छोड़ता।
[17] मेरी प्रार्थना यह है कि हमारे प्रभु मसीह येशु के परमेश्वर और प्रतापमय पिता तुम्हें ज्ञान व प्रकाशन की आत्मा दे ताकि तुम पिता को उत्तम रीति से जान सको।
[18] और तुम्हारे मन की आँखें ज्योतिर्मय हों जिससे तुम यह देख सको कि उसके द्वारा बुलाये जाने के कारण तुम्हारी आशा कितनी महान है और सन्तों के साथ (पवित्र लोगों के साथ) तुम्हें जो विरासत मिली है, वह कितनी वैभवपूर्ण तथा महिमामय है,
[19] और [ताकि तुम जान सको और समझ सको] कि उसकी सामर्थ कितनी बड़ी, असीमित और बेमिसाल है, और हम विश्वास करने वालों के लिए भी, जैसा कि उसकी उस बड़ी सामर्थ के कामों से पता चलता है, [20] जिसे उसने मसीह में दिखाया, जब उसने उसे मरे हुओं में से जीवित किया और स्वर्गिक [क्षेत्रों] में अपने दाहिने हाथ पर बैठाया,
[21] सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ्य, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर, जो न केवल इस लोक में, पर आनेवाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया;
[22] और सब कुछ उसके पाँवों तले कर दिया और उसे सब वस्तुओं पर शिरोमणि (प्रधान) ठहराकर कलीसिया को दे दिया,
[23] यह उसकी (मसीह की) देह है, और उसी की परिपूर्णता है, जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है।
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[21] हर नियम, अधिकार, ताकत, दबदबे और हर नाम से कहीं ऊपर, न सिर्फ़ इस ज़माने में और इस दुनिया में, बल्कि आने वाले ज़माने और दुनिया में भी। [22] और उसने सब कुछ अपने पैरों तले कर लिया है और उसे चर्च का सबसे बड़ा और सबसे बड़ा मुखिया [पूरे चर्च में एक मुखियापन] ठहराया है, [23] जो उसका शरीर है, उसकी पूरी खूबी जो सब में सब कुछ भर देता है [क्योंकि उस शरीर में उसका पूरा नाप रहता है जो सब कुछ पूरा करता है, और जो हर जगह हर चीज़ को अपने आप से भर देता है]।
चार्ल्स स्पर्जन ने कहा एक सिर बिना शरीर के अधूरा है। यीशु मसीह ने अपनी महिमा में अकेले रहने के बजाय, कलीसिया को अपना "शरीर" चुनकर खुद को हमारे साथ हमेशा के लिए जोड़ लिया है। स्पर्जन कहते हैं कि यदि मसीह (सिर) स्वर्ग में महिमा में बैठे हैं, तो उनका शरीर (कलीसिया) भी पूर्णतः सुरक्षित है। कोई भी दुश्मन कलीसिया को तब तक नष्ट नहीं कर सकता जब तक वह सिर को नष्ट न कर दे, जो कि पूरी तरह से असंभव है।
RRV और शैतान सिर तक पहुंच नही पा रहा क्योंकि शैतान को पाँव के नीचे रखा गया है। ताकि कलीसिया उसे प्रतिदिन रौंदे।
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